Sunday, November 15, 2015

बस इतनी सी ख्वाहीश है.....

























मै हर उस व्यक्ती से मिलना चाहता हु, अनजाने मे जिसे मैने दु:ख दिया है,
सिख कर कुछ बातो को उनसे, अच्छी जिंदगी मै भी जीना चाहता हु,   
मै हर उस व्यक्ती से मिलना चाहता हु, अनजाने मे जिसके कारण मै खुश हुआ हु,
जानकर उसके तरीके कोकीसी अनजान को खुश मै भी करना चाहता हु,

हर उस काम को करना है मुझे, जो आसानी से ना हो सके,  
थोडा पसीना भी आयेगा शायद, थोडे हात भी लडखडायेंगे मेरे,
पर जो महत्व उन लोगो को मिला है, मुझे भी वो पाना है,
करोडो की इस दुनीया मे, पहचान मुझे भी अपनी बनानी है,

क्या होती है कडवाहट, ये भी जानना है मुझे,
क्यु इतनी ऐहमीयत है उसे, किसीसे पुछना है मुझे,
प्यार से दो-दो बाते कर, उसे अपना बनाना है मुझे,
समय के हर पहलु मे, उसका साथ भी देना है मुझे,

उस बेचैनी को सहना मै चाहता हु,
उस बात को कहना मै चाहता हु,
जैसी भी हो पर जो सोची है जिंदगी मैने,
हर हाल मे मै उसे ही जीना चाहता हु,

क्या पता ये ज्यादा है, या फिर शायद कम है,
जैसी भी हो लेकीन, इतनी सी मेरी ख्वाहीश है,     



साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...