Friday, August 7, 2015

उलझन

कुछ सही होगा कुछ गलत होगा,
संभल कर जीने का यही एक कारण होगा.
नया कुछ करने की चाहत हमेशा रहेगी,
कर पायेंगे या नही, ये घबराहट भी तो आगे होगी -------- ()


किसी चीज का पुरा पता होना मतलब,
उस बेचैनी को मार देना, जो जीने का सही ढंग सिखाती है.
सब कुछ जो पहलेसे पता हो,
तो किसे मजा फिर आगे बढने मे आता है -------- ()


हर रोज एक ही काम हम न जाने कितनी बार करते है,
गलतीया उसमे भी होने की गुंजाइश तो फीर भी रहती है,
मतलब इसका ये नही, की हमे वो काम आता नही है,
लेकीन तजुरबे के साथ दिमाख का इस्तमाल क्या हम सही मे करते है -------- ()


जिंदगी ऐसी ही है दोस्तो, उलझन जिसे हम कहते है,
तजुरबा न होने से आने वाली एक बिमारी का नाम है,
सुलझ जाये जो, तो बिगडा काम बना दे,
उलझ जाये तो, सही-गलत को भी भुला दे -------- ()


कुछ तो ऐसा होगा जो इस उलझन से बचाये,
बस उसीको तो धुंडने आगे बढना है हमे,
सोच समझ कर कदम रखते आगे बढेंगे हम,
किस्मत……जो मौजुद है आगे पिछे चारो ओर हमारे,
छोड देते है, उलझन का सवाल भी उसीके सहारे -------- ()

साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...