Sunday, August 30, 2015

Friday, August 14, 2015

जरा याद उन्हे भी करलो...........In The Memory Of Our Soldiers

जिसे सोच के दिल घबराता हैवो मुस्कुराते हुये तुम युही कर गये,
याद तुम्हे कर फीर आंखे भर आई आजइतिहास मे अमर तुम हो गये.
युही नही ये देश“ गर्व ” तुम पर करता है,
तुम जवानो के खातीर ही तोये चैन की निंद ले पाता है,



बम ओर गोलीयो की आवाजो को कैसे तुम सह पाते हो,
मौत के उस मैदान मे भीतुम निडर कैसे हो जाते हो,
जो कर गुजर गये हो तुम सबहर साल इतिहास ये दोहरायेगा,
ना होता अगर साथ तुम्हाराकैसे होता जश्न ये आझादीका,



लब्ज नही है उस मा के लियेजिसने जनम्‌ तुम्हे दिया होगा,
हर बार देख कर तिरंगे कोउसने पास तुम्हे पाया होगा,
कोई पल नही होगा ऐसासास चैन की जब उसे आती होगी,
दुर कही उन सीमाओंसेयादो की डोली जब आती होगी,



सुनकर तुम्हारी कहानीओ कोहम सबका बचपन गुजरा है,
जब जब हुई है गौरव की बातेसभीने तुमको ही याद किया है
सब झुम रहे हे खुशीओसे, आज आझादी के इस मौके पर,
लेकीन......ना भुले है तुमको कभीना भुलेंगे कभी हम,
ये वादा पुरानाहम आज फिर दोहराते है,
ये वादा पुरानाहम आज फिर दोहराते है……


जय जवान      जय हिंद        वंदे मातरम्‌ 

Friday, August 7, 2015

उलझन

कुछ सही होगा कुछ गलत होगा,
संभल कर जीने का यही एक कारण होगा.
नया कुछ करने की चाहत हमेशा रहेगी,
कर पायेंगे या नही, ये घबराहट भी तो आगे होगी -------- ()


किसी चीज का पुरा पता होना मतलब,
उस बेचैनी को मार देना, जो जीने का सही ढंग सिखाती है.
सब कुछ जो पहलेसे पता हो,
तो किसे मजा फिर आगे बढने मे आता है -------- ()


हर रोज एक ही काम हम न जाने कितनी बार करते है,
गलतीया उसमे भी होने की गुंजाइश तो फीर भी रहती है,
मतलब इसका ये नही, की हमे वो काम आता नही है,
लेकीन तजुरबे के साथ दिमाख का इस्तमाल क्या हम सही मे करते है -------- ()


जिंदगी ऐसी ही है दोस्तो, उलझन जिसे हम कहते है,
तजुरबा न होने से आने वाली एक बिमारी का नाम है,
सुलझ जाये जो, तो बिगडा काम बना दे,
उलझ जाये तो, सही-गलत को भी भुला दे -------- ()


कुछ तो ऐसा होगा जो इस उलझन से बचाये,
बस उसीको तो धुंडने आगे बढना है हमे,
सोच समझ कर कदम रखते आगे बढेंगे हम,
किस्मत……जो मौजुद है आगे पिछे चारो ओर हमारे,
छोड देते है, उलझन का सवाल भी उसीके सहारे -------- ()

साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...