Monday, July 13, 2015

जमाना बदल रहा है......

१ जमाना बदल रहा है, वक्त तेजीसे आगे बढ रहा है, इंसानी सोच को दबाये नजाने कोन बैठा हुआ है.

“आज भी हम वही सोच ओर कुछ पुरानी बातो को लेकर विवादो मे फसे रहते है, शायद इसी वजह से हम वक्त के साथ नही बढ पा रहे है”

२. बाते तेरी सही होगी, मगर गलत वो फीर भी मेरे लिये है, क्योकी मै कीसी ओर पक्ष से ओर तु कीसी ओर पक्ष   से है, ऐसी ये अपनी सोच है.

“कभी कभी अगला इंसान भी सही होता है, पर क्योकी वो कीसी दुसरे पक्ष से है बस इसीलिये हम उसे गलत ठहराते है”

३. संघर्ष ये युही चलता रहेगा, भला ना तेरा कभी ना मेरा होगा, सच ना लगे तो मुडकर देख बिते हर दिन की कहानी मे, खुशी चंद मिन्टो की पाकर, पश्तावा हर वक्त तुने भी तो किया है.

“एक दुसरे को निचा दिखाकर हम आगे तो बढ जाते है, पर वक्त के साथ हमे अपनी गलतीयोंका ऐहसास होता है, तब हमे बुरा लगता है, कभी कभी तो ना हम उन्हे आगे बढने देते है नाही खुद आगे बढते है”

४. इंसान को इंसान से लढने की खबर कभी कभी आती थी देश की सीमाओ से, आज तो हर दिन जैसे इसकी प्रतीयोगीताये हो रही है.

“आज जैसे रोज ही घुसपेटीयो व्दारा हमले किये जा रहे है, हर दिन जिसमे बढोतरी हो रही है, लोगो को पहले सिर्फ सीमाओ पर लढते देखा था, आज पर देश के अंदर भी ये सब हो रहा है, बदलती इंसानी सोच का ये एक ओर उदाहरण है”

५. बदलना तो होगा ही, आज किसी ओर को तो कल किसी ओर को, लेकीन उस कल की राह मे बर्बाद अपना आज, तुने भी किया ओर मैने भी किया है.

“पहले वो-पहले मै इसी इंतजार मे हम अपना आज खराब कर है, आने वाला समय शायद हमे ये मौका भी ना दे”

६. पर इतना निचे कभी ना गिरा मै की कोई कोसे मेरे पैदा होने पर, अंजाम दे रहे ऐसी बातो को ये लोग क्या सही मे इंसान की प्रजाती है, अरे बिटीया जो महफुज थी घरो मे उनके, डर क्यो उसको उसके अपनो से लगने लगा है.

“पिछले कुछ दिनो मे ऐसी कही घटनाये आयी, लडकीया कभी बहार के तो कभी घर वालो के सोच का शिकार हुई, इंसानी सोच को ये सिधा तमाचा है”


७. जमाना बदल रहा है, इसे सुनकर हैरानी इसीलिये नही होगी, क्योकी सब कुछ अपने ही आंखो के सामने हो रहा है, दिखाया हमे बस वो जा रहा है, जीसे हम देखना चाहते है, सच्ची बातो से दुखी तो कोई ओर ही हो रहा है.

“जो कुछ हो रहा है, वो हमसे छुपा हुआ नही है, पर जिसपे गुजरा है बस वही सच जानता है, बाकी लोगो को गुमराह करने हजारो लोग आज भी यहा मौजुद है”

८. ये एक ही बात नही है, हर वक्त कुछ ना कुछ ऐसा ही हो रहा है, सच छुपाकर बस वही दिखाया जा रहा है, किसी ओर पे बिती ये बाते कहि मेरे साथ ना हो, इसीलिये सोच को सुधारा है मैने, अकड को अपनी छोड बस मेरी यही बात मान ले, बदल दे तुभी अपनी सोच को, क्योकी जमाना अब सही मे बदल रहा है.
     
“ऐसी नजाने कितनी बाते ओर हो रही है, वही सब कुछ हमारे अपनो पर या हम खुद पर होने तक अब हमे रुकना नही है, अछी सोच हि एक केवल माध्यम है सुनहरे कल का, इसीलिये हमे बदलना आज ही है”

साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...