Sunday, June 28, 2015

बस ऐसे ही चलना है मुझे….

रोना क्या होता है ये कोई मुझे पुछे तो शायद मै नही बता पाऊंगा,
क्योंकी उसे अक्सर मै छुपाते आया हु,

खुद को सही साबीत करने मे ही वक्त निकलता जा रहा था,
तो गलती मेरी है या नही ये जानना ही छोड दिया मैंने,
ओर हमेशा दुसरो को सही साबीत करने मे लग गया,

आज पर वक्त बदल गया है लगता, क्योंकी आज जब मै वही सबकुछ करता हु
तो लोग हसते है मुझ पर, कहते है जमाना आगे निकल गया और मै वही पर हु,

शायद वो सही कहते है , पिछे हु मै जमाने के ,
क्योंकी गलत ओर सही की समझ मुझे आज भी है,

सोचता हु की अगर छोड दु अपनी आदतो को,
तो क्या मै भी साथ चलने लगुंगा जमाने के ? सवाल आज भी वही है,

कभी वो रफ्तार पकड्ने की कोशीश ही नही की क्योंकी नफरत है मुझे,
“जाकर फीर पलट कर आने की”, डरता हु कही वही ना करना पडे आगे जाकर.

देर लगेगी पर मुकाम सही हासील होगा जीसे सोचकर आगे बढ रहा हु,
रोया ना हु कभी अपनी कोशीशो पर, ना सोचता हु करना पडे कभी मंझील पे पहुचकर.   
 

कोई देख रहा है कही से, ये एक ही सच है जीसे बचपन से मै मानते आया हु,
कारण शायद यही होगा,सही राह पे मै अबतक चलते आया हु.

आखीर मे एक ही गुजारीश है उपरवाले से, कभी कोई गलती ऐसी ही होने देना मेरे हातो से,
जिसके लिये तेरे पास आकर माफी तो भी मांग सकु.  

साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...