Tuesday, June 23, 2015

समय.....

रोशन हो रहा है आसमा, उजाले की और ले जायेगा,
रोशनी को फीर पिछे छोड, नजाने कल क्या लायेगा.

बिता हुआ समय शायद अच्‌छा होगा, पर लौट के ना वो आयेगा,
इंतजार तो अब बस उसीका है, क्या क्या नया ये दिखायेगा.

छुने की कोशीश की थी कभी, मेहसुस हुआ था मुझे कुछ,
वापस वही दोहराने गया तो नजारा कुछ और ही था.

समझ गया था एक बात को मै अब, इसकी रचना कैसी थी,
साथ चलो तो जिंदगी थी, वरना हर बात मेरी वो अधुरी थी.

शायद समय ये वही होगा, जीवन मे आपके जो बदलाव लायेगा,
रफ्तार को अपनी धिमा कर इसे छुके देखो तो.

समय भी आपका होगा और लोग भी आपके होगे,बस रुकना ना तुम कभी,
कैसा लगता है हर वो सपना जरा पुरा करके देखो तो.

साल नया पर ख्वाब वही . . .

चलो मुबारक बात दे नये साल के तोंफे कि, उम्मीद नयी लेकर हम करे बात पुराने ख्वाबो कि. . . नही हुआ है पुर्न  लेकीन ख्वाब मेरा वो आज भी ...